डॉ. रवीन्द्र प्रसाद सिंह 'नाहर'
#238 – गोविंदपुर विधानसभा संभावित उम्मीदवार, नवादा, बिहार
डॉ. रवीन्द्र प्रसाद सिंह ‘नाहर’ नवादा, बिहार के सम्मानित साहित्यकार, समाजसेवी और प्रशासक हैं। वे 238-गोविंदपुर विधानसभा क्षेत्र से जन सुराज पार्टी के संभावित उम्मीदवार हैं। जेएनयू से लेकर सरकारी सेवा तक, और साहित्य से लेकर समाजसेवा तक, उनका पूरा सफर जनसेवा की भावना से ओतप्रोत रहा है।
वर्तमान में वे प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित जन सुराज आंदोलन से जुड़े हैं, जो पारदर्शिता, विकास और जनभागीदारी पर आधारित राजनीति की पहल है। जन सुराज का मूल मंत्र – “सही लोग | सही सोच | सामूहिक प्रयास” – उन्हें एक ऐसे बिहार के निर्माण की दिशा में प्रेरित करता है जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सभी तक पहुँचे।

















परिचय
डॉ. रवीन्द्र प्रसाद सिंह न केवल एक साहित्यकार और प्रशासक हैं, बल्कि पत्रकारिता, शिक्षा, पर्यावरण, समाजसेवा, संस्कृति और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते रहे हैं। समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रही— उन्होंने हर स्तर पर ज़मीनी कार्यों के ज़रिये परिवर्तन की अलख जगाई है। यह अनुभाग उनके विविध सामाजिक और पत्रकारिक योगदानों की झलक प्रस्तुत करता है— जहाँ वे एक मार्गदर्शक, आयोजक, संरक्षक और प्रेरक की भूमिकाओं में नज़र आते हैं।
डॉ. सिंह की रचनाएँ मुंबई सहित कई शहरों की पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। उन्होंने भुवनेश्वर, शिमला, कोलकाता और मुंबई की हिंदी पत्रिकाओं का संपादन और सहयोग किया है। दिल्ली की द्विभाषी पत्रिका ‘Pravasi Indians’ (प्रवासी इंडियंस) के भी वे संपादकीय सलाहकार हैं। आकाशवाणी शिमला और मुंबई से उनके विचार-विमर्श प्रसारित होते रहे हैं। कवि-सम्मेलनों में सक्रिय भागीदारी के साथ वे लोक-साहित्य, राजनीतिक विमर्श, फोटोग्राफी और राजभाषा पत्रिकाओं में गहरी रुचि रखते हुए रुचिकर न्यूज़पेपर-कतरन-संग्रह की हॉबी रखते हैं।
जन संकल्प
गोविंदपुर की जनता की ज़रूरतों और उम्मीदों को समझना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। इन्हीं ज़मीनी सच्चाइयों को ध्यान में रखते हुए, डॉ. रवीन्द्र प्रसाद सिंह ‘नाहर’ ने चार मुख्य दिशा-निर्देश तय किए हैं — जो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और पलायन रोकने जैसे जीवन से जुड़े पहलुओं पर केंद्रित हैं। यह संकल्प सिर्फ वादों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भविष्य की नींव रखने का एक ईमानदार प्रयास है।

शिक्षा का सशक्त आधार
हर पंचायत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सरकारी स्कूलों में संसाधन और बच्चों के लिए डिजिटल लर्निंग की सुविधा सुनिश्चित करना।

स्वास्थ्य तक हर घर की पहुँच
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सशक्त बनाना, दवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से आमजन की सेहत को प्राथमिकता देना।

रोज़गार और स्वरोजगार के अवसर
स्थानीय युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार योजनाओं में मार्गदर्शन, और लघु उद्यमों को बढ़ावा देना।

पलायन रोकने की ठोस पहल
रोज़गार, शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं को गाँव में ही सुलभ बनाकर युवाओं और परिवारों को बिहार छोड़ने की मज़बूरी से मुक्त करना।
जन यात्रा
जहाँ बात हो लोगों की, वहाँ मौजूद रहना ज़रूरी होता है। डॉ. सिंह ने संवाद को मंच पर नहीं, मैदान में जीया है — गांव-गांव जाकर लोगों की बात सुनी, समझी और साथ चलने का भरोसा दिया है।














जन समर्थन
डा. रवीन्द्र प्रसाद सिंह जाने माने साहित्यकार, भाषाविद्, कुशल बैंकर, वित्त-विश्लेषक और प्रशासक रहे हैं। विद्यार्थी जीवन में एक मेधावी अध्येता के साथ-साथ छात्र, किसान और मजदूर आंदोलन में डा. सिंह की सक्रिय भागीदारी रही है। बिहार की माटी और बिहार की गौरवशाली परंपरा और संस्कृति के प्रति सदैव उनका गहरा एवं अटूट लगाव रहा है।
बैंकिंग क्षेत्र से सेवानिवृत्त होने के बाद स्वतंत्र चिंतन-मनन और लेखन के इरादे छोड़ आज रवीन्द्र जी बिहार के समग्र-विकास हेतु बिहार परिवर्तन का संकल्प लेकर अदम्य साहस और भरपूर ऊर्जा तथा स्फूर्ति के साथ पूर्णत: सक्रिय हैं। मैं ऐसे ऊर्जावान मित्र की सफलता के प्रति पूर्णत: आश्वस्त हूं और इसके लिए हार्दिक शुभकामनाएं प्रदान करता हूं।
डॉ. सुभाषचंद्र शर्मा
कला, साहित्य और समाज-विज्ञान के अध्येता; आजीविका : केंद्रीय शिक्षा संस्थान में शोध जर्नल के संपादन और प्रकाशन कार्य से संबद्ध; सेवानिवृत्ति पश्चात स्वास्थ्य, चिंतन-मनन, स्वतंत्र लेखन तथा सामाजिक कार्य में संलग्न।
आदरणीय डॉ. रवीन्द्र प्रसाद सिंह ‘नाहर’ वरिष्ठ रचनाकार एवं समीक्षक हैं। कला, साहित्य, संस्कृति एवं सामाजिक कार्यों से उनका गहरा जुड़ाव है। लगातार चिंतन-मनन में लगे रहते हैं और युवा साहित्यकारों तथा समाजसेवियों को मार्गदर्शन भी करते रहते हैं। राजनीतिक क्षेत्र में भी उनकी गहरी पैठ है। राष्ट्रीयत्व की भावना से ओत-प्रोत डॉ. सिंह एक कुशल कार्यकर्ता भी हैं। उनकी आगामी गतिविधियों के लिए हमारी शुभकामनाएं।
डॉ. रमेश यादव
सेवा निवृत्त बैंक अधिकारी, साहित्यकार एवं स्वतंत्र पत्रकार, महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्पेशल एक्जीक्यूटिव ऑफिसर पद की जिम्मेदारी, विविध विधाओं में कुल 17 पुस्तकें प्रकाशित, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के कई पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त।
डॉ. रवीन्द्र प्रसाद सिंह को छात्र जीवन से ही एक जुझारू, कर्मठ, जागरूक एवं सत्यनिष्ठ समाजसेवी के रूप में जानता हूं। उसी काल से उनके साथ साहित्यिक, सामाजिक तथा राजनैतिक विषयों पर चर्चा सदैव ज्ञानवर्धक रही है।
प्रभात कुमार
भूतपूर्व विदेशी भाषा सलाहकार (सेवानिवृत्त), रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार; वर्तमान शोध छात्र, इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय
डॉक्टर साहेब, आप साहित्य के एक महान साहित्यकार रहे हैं। अब आप की रुचि जन सेवा करने की है, यह आपका बहुत ही अच्छा निर्णय है। आप इस कार्य में सफल हों, यह मेरी हार्दिक शुभ कामना है।
बाबूराम खरवार
सेवानिवृत्त प्रबंधक, आई डी बी आई बैंक, दिल्ली अंचल, दिल्ली.